भोपालः अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अपनी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। यूं तो राजधानी भोपाल में बने एम्स में भी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के मामले में कई कीर्तिमान रचे हैं। लेकिन इस समय यहां कई गंभीर लापरवाहियां भी सामने आ रही हैं। यहां दवा की कमी और ऑपरेशन संबंधी कुछ समस्याएं पिछले दिनों से बढ़ गई हैं। इससे मरीजों का भरोसा डगमगाने लगा है।
दरअसल, यहां पर डेढ़ हफ्ते तक भर्ती रहने के बाद भी मरीज को बिना ऑपरेशन के घर लौटना पड़ रहा है। एम्स की एनुअल रिपोर्ट में भी यह बात सामने निकल कर आई है। अगस्त 2024 में यहां ऑपरेशन 687 ऑपरेशन हुए थे जो इस साल अगस्त में 4508 रह गए हैं। यानी पिछले अगस्त महीने के मुकाबले देखा जाए तो इस साल लगभग 56000 ऑपरेशन कम हुए हैं। यह स्थिति जनवरी 2025 से ही बनी हुई है।
10 लाख मरीज पहुंचते हैं हर साल
गौरतलब है कि एम्स की ओपीडी में हर साल इलाज के लिए 10 लाख से अधिक मरीज पहुंचते हैं। भर्ती मरीजों की संख्या 58000 से ज्यादा रहती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में यहां 11547 छोटा ऑपरेशन हुए थे। वहीं, 18156 बड़े ऑपरेशन और 698000 प्रोसिजर हुई थी। हालांकि इस साल की शुरूआत में स्थिति गड़बड़ा गई। जनवरी 2025 से यहां जरूरी सामान की कमी हो गई।
एम्स के सूत्रों के अनुसार हमें मरीजों को लौटाना ठीक नहीं लगता। लेकिन क्या करें पिछले 8 महीने से यहां कुछ सामानों की कमी है। इस कारण दिक्कत हो रही है। एम्स में सर्जिकल कैप्स, ग्लव्स, मास्क, शुगर टेस्टिंग स्ट्रिप जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा ओटी, आईसीयू और वार्ड में इस्तेमाल होने वाला रोजमर्रा का सामान भी बड़ी दिक्कत के साथ मिल रहा है। कई सामान आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। कई बार इमरजेंसी होने पर डॉक्टर मरीज से यह सामान बाहर से मंगवाते हैं।
तीन साल से एक ही जगह से सर्जरी
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले एम्स भोपाल में दवा खरीदी के लिए नियमों का पालन नहीं हुआ था। इसके साथ ही तीन-चार साल से टेंडर नहीं निकलने के कारण सीधे अमृत फार्मेसी से करोड़ों रुपए की दवाई खरीदी गई थी। इस पर शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई थी।
सामान की कमी से घटे इलाज
बताया जाता है कि नए एम्स 400 से 500 करोड़ रुपए की बजट में संचालित हो रहे हैं। वहीं, भोपाल एम्स को 2022-23 और 2023-24 में करीब 700 करोड़ का बजट मिला। इस कारण यहां पर कई सुविधाओं की दिक्कत हो गई। अस्पताल मैनेजमेंट कहता है कि बजट 960 बेड के हिसाब से मिलता है। लेकिन वर्तमान में 1250 बेड संचालित हो रहे हैं। पहले फंड पर्याप्त था और आयुष्मान की क्लेम भी जल्दी पास हो जाते थे। इसलिए इकट्ठा सामान खरीद लिया जाता था और मरीजों में वितरित कर देते थे। लेकिन अब समान की समस्या होने के कारण इलाज में दिक्कत हो रही है।
आपको बता दें कि वर्तमान में एम्स भोपाल में नियमित कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस कारण कई नीतिगत निर्णय लेने में दिक्कत भी हो रही है। बताया जाता है कि और भोपाल में बिलुरबिन पुलिया लिवर रोग का टेस्ट क्रिएटिनिन किडनी की कार्य क्षमता के लिए जांच गुड कोलेस्ट्रॉल जीटी जैसे कई टेस्ट करने में दिक्कत जा रही है।
दरअसल, यहां पर डेढ़ हफ्ते तक भर्ती रहने के बाद भी मरीज को बिना ऑपरेशन के घर लौटना पड़ रहा है। एम्स की एनुअल रिपोर्ट में भी यह बात सामने निकल कर आई है। अगस्त 2024 में यहां ऑपरेशन 687 ऑपरेशन हुए थे जो इस साल अगस्त में 4508 रह गए हैं। यानी पिछले अगस्त महीने के मुकाबले देखा जाए तो इस साल लगभग 56000 ऑपरेशन कम हुए हैं। यह स्थिति जनवरी 2025 से ही बनी हुई है।
10 लाख मरीज पहुंचते हैं हर साल
गौरतलब है कि एम्स की ओपीडी में हर साल इलाज के लिए 10 लाख से अधिक मरीज पहुंचते हैं। भर्ती मरीजों की संख्या 58000 से ज्यादा रहती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में यहां 11547 छोटा ऑपरेशन हुए थे। वहीं, 18156 बड़े ऑपरेशन और 698000 प्रोसिजर हुई थी। हालांकि इस साल की शुरूआत में स्थिति गड़बड़ा गई। जनवरी 2025 से यहां जरूरी सामान की कमी हो गई।
एम्स के सूत्रों के अनुसार हमें मरीजों को लौटाना ठीक नहीं लगता। लेकिन क्या करें पिछले 8 महीने से यहां कुछ सामानों की कमी है। इस कारण दिक्कत हो रही है। एम्स में सर्जिकल कैप्स, ग्लव्स, मास्क, शुगर टेस्टिंग स्ट्रिप जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा ओटी, आईसीयू और वार्ड में इस्तेमाल होने वाला रोजमर्रा का सामान भी बड़ी दिक्कत के साथ मिल रहा है। कई सामान आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। कई बार इमरजेंसी होने पर डॉक्टर मरीज से यह सामान बाहर से मंगवाते हैं।
तीन साल से एक ही जगह से सर्जरी
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले एम्स भोपाल में दवा खरीदी के लिए नियमों का पालन नहीं हुआ था। इसके साथ ही तीन-चार साल से टेंडर नहीं निकलने के कारण सीधे अमृत फार्मेसी से करोड़ों रुपए की दवाई खरीदी गई थी। इस पर शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई थी।
सामान की कमी से घटे इलाज
बताया जाता है कि नए एम्स 400 से 500 करोड़ रुपए की बजट में संचालित हो रहे हैं। वहीं, भोपाल एम्स को 2022-23 और 2023-24 में करीब 700 करोड़ का बजट मिला। इस कारण यहां पर कई सुविधाओं की दिक्कत हो गई। अस्पताल मैनेजमेंट कहता है कि बजट 960 बेड के हिसाब से मिलता है। लेकिन वर्तमान में 1250 बेड संचालित हो रहे हैं। पहले फंड पर्याप्त था और आयुष्मान की क्लेम भी जल्दी पास हो जाते थे। इसलिए इकट्ठा सामान खरीद लिया जाता था और मरीजों में वितरित कर देते थे। लेकिन अब समान की समस्या होने के कारण इलाज में दिक्कत हो रही है।
आपको बता दें कि वर्तमान में एम्स भोपाल में नियमित कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस कारण कई नीतिगत निर्णय लेने में दिक्कत भी हो रही है। बताया जाता है कि और भोपाल में बिलुरबिन पुलिया लिवर रोग का टेस्ट क्रिएटिनिन किडनी की कार्य क्षमता के लिए जांच गुड कोलेस्ट्रॉल जीटी जैसे कई टेस्ट करने में दिक्कत जा रही है।
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