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Navratri 2025 Kalratri Pujan : मां कालरात्रि का ध्यान एवं उपासना से खुलते हैं ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों के द्वार

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मां कालरात्रि का स्वरूप भयानक है लेकिन वह भक्तों को शुभ फल ही देती है, ये स्मरण करने वाले को शुभ वर प्रदान करती हैं, उनकी रक्षा के लिए हथियार भी रखती हैं। माता उनके लिए ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए राह खोल देती हैं, साधक के समस्त पाप धुल जाते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। योगी साधकों द्वारा कालरात्रि का स्मरण ‘सहस्त्रार’ चक्र में ध्यान केंद्रित करके किया जाता है। देवी का सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि - मां कालरात्रि अपने भक्त हेतु ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए राह खोल देती हैं। मां का कालरात्रि स्वरूप अति भयावह व उग्र है। भयानक स्वरूप होने के बावजूद शुभ फल देने वाली माँ कालरात्रि नकारात्मक, तामसी और राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश करके भक्तों को दानव, दैत्य, राक्षस, भूत-प्रेत आदि से अभय प्रदान करती हैं। मां का यह रूप ज्ञान और वैराग्य प्रदान करता है। मां कालरात्रि का स्वरूप - घने अंधेरे की तरह एकदम गहरे काले रंग वाली, तीन नेत्र वाली, सिर के बाल बिखरे रखने वाली और अपनी नाक से आगे की लपटों के रूप में सांसें निकालने वाली कालरात्रि, मां दुर्गा का सातवां विग्रह स्वरूप हैं। इनके तीनों नेत्र ब्रह्माण्ड के गोले की तरह गोल हैं। इनके गले में विद्युत जैसी छटा देने वाली सफेद माला सुशोभित रहती है। इनके चार हाथ हैं। कालरात्रि माँ के चार हाथों में से दो हाथों में शस्त्र रहते हैं। एक हाथ अभय मुद्रा में तथा एक वर मुद्रा में रहता है। दाहिनी ओर का ऊपर वाला हाथ हंसिया अथवा चंद्रहास खड्ग धारण करता है जबकि नीचे वाले हाथ में काँटेदार कटार रहती है। मां का ऊपरी तन लाल रक्तिम वस्त्र से तथा नीचे का आधा भाग बाघ के चमड़े से ढका रहता है। नौ में समाई है ब्रह्माण्ड की अनन्त शक्ति - भगवती दुर्गा की आराधना का पर्व, नवरात्र, नवमी पर्यन्त चलता है। नवरात्रि शब्द अपने आप में नौ के महत्व का बोध कराता है, नौ पूर्णांक है, इसलिए नवरात्रि के दिनों में देवी मंत्रों का जाप 108 के क्रम में करने पर पूर्णांक 9 के प्रभाव से भक्तों की मनोकामनाऐं पूर्ण होती हैं।
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