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गलत दांव लगा बैठे हैं ट्रंप.... चीन और भारत से जो चाहते हैं उसके लिए अमेरिकी नहीं तैयार, अब आगे क्या?

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नई दिल्‍ली: अमेरिका अपनी फैक्ट्रियों को वापस लाना चाहता है। लेकिन, शायद फैक्ट्री में काम करने वाले लोग कहीं आगे बढ़ चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए है। लेकिन, एक सच सामने आ रहा है कि शायद मॉडर्न अमेरिकी वर्कर इसके लिए तैयार नहीं हैं। चीन और भारत मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में प्रमुख खिलाड़ी बन गए हैं। उनके पास कुशल श्रमिक और कम लागत वाली उत्पादन क्षमता है, जो उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाती है।ट्रंप पॉलिसी के एलान के साथ एक सांस्कृतिक बहस छिड़ गई है। एक इन्वेस्टर ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, 'ट्रंप टैरिफ पर जो बात भूल रहे हैं, वह यह है कि ज्‍यादातर अमेरिकी फैक्ट्रियों में काम नहीं करना चाहते। इस नई पीढ़ी को तो बस YouTube चैनल खोलना है और क्रिप्टो कॉइन से किसी को धोखा देना है।' लोगों को सोचने पर क‍िया मजबूरएंजी जी के इस पोस्ट ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने की इच्छा या क्षमता है? इस पर बहस छिड़ गई।एक यूजर ने उनकी बात को चुनौती दी। उसने कहा, 'जरूरी नहीं, मुझे लगता है कि यह युवाओं में से सिर्फ 15-20% की बात है। बाकी 80-85% अच्छी सैलरी वाली (मॉडर्न) फैक्ट्री की नौकरी कर सकते हैं। लेकिन, युवा महिलाओं के बारे में कुछ कहना मुश्किल है।' एंजी ने जवाब दिया, 'मुझे नहीं पता। मुझे तो वैसी ही फीलिंग आ रही है, जैसी तब आई थी जब ओबामा ने मैन्युफैक्चरिंग करने वाले लोगों से कोडिंग सीखने को कहा था। अब वे कोडिंग कर सकते हैं और ट्रंप उन्हें मैन्युफैक्चरिंग सीखने को कह रहे हैं।'एक और यूजर एड्रियन मॉरिस ने और भी कड़वी सच्चाई बताई। उन्होंने कहा, 'समस्या यह है कि उन्होंने कोडिंग नहीं सीखी। मैंने 20 सालों से देखा है कि 90% वर्कफोर्स को एक्‍सेल भी ठीक से नहीं आता, SQL, Python तो दूर की बात है। ये स्किल्स कुछ खास जगहों पर ही सिमट कर रह गई हैं, जबकि बाकी लोग पीछे छूट गए।' सपना पूरा होना मुश्‍क‍िल उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप का इंडस्ट्रियल अमेरिका का सपना एक ऐसे वर्कफोर्स पर टिका है, जो अभी है ही नहीं। कहा, 'ट्रंप जिस तरह की मैन्युफैक्चरिंग की बात कर रहे हैं, उसके लिए हाईली स्किल्ड वर्कर्स की जरूरत होगी। जो रोबोटिक मैन्युफैक्चरिंग (जैसे टेस्ला प्लांट) और अब AI के साथ मिलकर काम कर सकें। इसलिए मुझे लगता है कि समस्या सिर्फ ट्रेनिंग और स्किल्स की नहीं है। बल्कि वर्कफोर्स की क्षमता की भी है, जो अभी उस स्तर पर नहीं है।'ट्रंप की टैरिफ योजना 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' के नाम से सामने आई। इसमें सभी इम्पोर्ट पर 10% का टैक्स लगाया गया है। साथ ही 60 देशों पर 50% तक के अतिरिक्त टैक्स लगाए गए हैं। सबसे ज्‍यादा असर चीन (54% टोटल), वियतनाम (46%) और कंबोडिया (49%) पर पड़ेगा।इस पर दुनिया भर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। चीन ने भी जवाबी टैरिफ के साथ अपना रुख साफ कर दिया है। EU भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। कनाडा, ब्राजील, जापान और दक्षिण कोरिया ने इस योजना की निंदा की है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और मैक्सिको डिप्लोमेटिक रास्ते तलाश रहे हैं।
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