शिमला, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । हिमाचल प्रदेश में नवगठित शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव अब दो साल तक नहीं होंगे। विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को यह फैसला लिया गया। इस संदर्भ में सदन में हिमाचल प्रदेश नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित किया गया। विपक्ष ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने गुरुवार को यह विधेयक पेश किया था। इसमें कहा गया है कि नए निकायों में कर्मचारियों, कार्यालय और वित्तीय संसाधनों की कमी है। इसी कारण चुनावों को दो साल तक स्थगित किया जा रहा है। विपक्षी दल भाजपा ने आज एआ विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। भाजपा ने कहा कि सरकार ओबीसी आरक्षण की आड़ में सभी शहरी निकायों के चुनाव टाल रही है।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जनभावना की अनदेखी कर रही है। कई विधायकों ने कहा कि इन निकायों को गैर-अधिसूचित किया जाए। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विपक्ष की आपत्तियों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है। बेतरतीब निर्माण पर रोक लगाना जरूरी है। राज्य में 3615 ग्राम पंचायतें
हैं। कई सीमांत क्षेत्र तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे हैं। 2012 की तुलना में 2024 में शहरी आबादी 60 प्रतिशत बढ़कर 9.16 लाख हो गई है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इसमें कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं है। हरियाणा, असम और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने भी चुनाव स्थगित किए हैं। उन्होंने बताया कि ओबीसी जनसंख्या का सर्वेक्षण 2010 में केवल ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ था। अब नया सर्वे चल रहा है ताकि ओबीसी के साथ अन्याय न हो। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार चुनाव से भाग रही है। यह संशोधन संवैधानिक मानदंडों के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने जनभावना के खिलाफ तीन नगर निगम, तीन नगर परिषद और 17 नगर पंचायतें बनाई हैं। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को संशोधन पास ही करना था तो चुनाव से क्यों भागी। विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता के मूड से डर रही है। विपक्ष के अन्य विधायक राकेश जम्वाल, आईडी लखनपाल, त्रिलोक जम्वासल, हंस राज, इंदर सिंह गांधी, दलीप ठाकुर और आशीष शर्मा ने भी विधेयक का विरोध किया।
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(Udaipur Kiran) / उज्जवल शर्मा
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