केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार वक़्फ़ संशोधन कानून लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य उन सरकारी ज़मीनों को वापस लेना है जिन्हें वक़्फ़ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया था। यह कदम 1976 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीति के ठीक विपरीत है, जिन्होंने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे इन संपत्तियों को वक़्फ़ बोर्ड को सौंप दें। इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर सरकार की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति समय के साथ बदल रही है।
इंदिरा गांधी का 1976 का पत्र और उनकी नीति
26 मार्च 1976 को इंदिरा गांधी ने छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों और दिल्ली के उपराज्यपाल को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े विवादों को प्राथमिकता से हल करने का निर्देश दिया था। यह पत्र वक़्फ़ की आधिकारिक वेबसाइट और नेशनल वामसी प्रोजेक्ट पर मौजूद है। इंदिरा गांधी ने लिखा था कि विभाजन के बाद उपजी अस्थिरता के कारण कई वक़्फ़ संपत्तियां निजी हाथों या राज्य सरकार के विभागों के नियंत्रण में चली गई हैं। उन्होंने राज्यों से कहा था कि वे इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर हल करें ताकि अनावश्यक कानूनी विवादों से बचा जा सके।
वक़्फ़ संपत्तियों पर विवाद सुलझाने के लिए तीन प्रस्ताव
इंदिरा गांधी ने इन विवादों को हल करने के लिए तीन मुख्य उपाय सुझाए थे। पहला, जहां संभव हो, वहां वक़्फ़ संपत्तियों को खाली कराकर वक़्फ़ बोर्ड को सौंप दिया जाए। दूसरा, यदि उन संपत्तियों पर महंगी इमारतें बन चुकी हैं और उन्हें खाली कराना संभव नहीं है, तो राज्य सरकारें वक़्फ़ बोर्ड के साथ स्थायी पट्टे पर समझौता करें और उन्हें ज़मीन के बाजार मूल्य का बड़ा हिस्सा मुआवजे के रूप में दें। तीसरा, राज्य सरकारें उचित बाजार मूल्य का भुगतान कर वक़्फ़ बोर्ड से संपत्तियों पर उनके अधिकारों को छोड़ने का समझौता करें।
राज्यों को वक़्फ़ संपत्तियों की सूची सौंपने का निर्देश
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि वक़्फ़ बोर्ड ने राज्य सरकारों को उन संपत्तियों की सूची भेजी थी जो सरकारी विभागों के नियंत्रण में थीं। गांधी ने निर्देश दिया था कि इन मामलों को सुझाए गए तरीकों से हल किया जाए और प्रत्येक राज्य को इस पर मासिक रिपोर्ट भेजनी होगी।
वक़्फ़ संपत्तियों पर किराया नियंत्रण अधिनियम की छूट
इसके अलावा, इंदिरा गांधी ने पत्र में यह भी चिंता जताई थी कि वक़्फ़ संपत्तियां बहुत ही कम किराए पर लीज़ पर दी जा रही थीं और किराया नियंत्रण अधिनियमों के कारण किराया नहीं बढ़ाया जा सकता था। उन्होंने वक़्फ़ जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुझाव दिया था कि धार्मिक और समाजसेवा से जुड़ी सार्वजनिक वक़्फ़ संपत्तियों को इन अधिनियमों से छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु ने पहले ही इस छूट को लागू कर दिया था और अन्य राज्यों को भी ऐसा करने के लिए कहा।
मोदी सरकार का नया रुख और संभावित प्रभाव
इंदिरा गांधी का यह पत्र पंजाब के मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री बीडी गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस परमार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एसबी चव्हाण, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एससी शुक्ला, राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी और दिल्ली के उपराज्यपाल कृष्ण चंद को भेजा गया था।
अब, नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित वक़्फ़ संशोधन कानून अतीत की नीतियों से अलग दृष्टिकोण दर्शाता है। यह बदलाव सरकारी और धार्मिक संपत्तियों के कानूनी ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि यह देश में वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और सरकारी नियंत्रण को सीधे प्रभावित करेगा।
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